शुगर में क्या खाना चाहिए: भारतीय थाली वाली डायबिटीज डाइट

Steel thali with salad, bhindi sabzi, dal, paneer cubes and two rotis, with a steel glass of water

Sugar me kya khana chahiye? अलग मेन्यू नहीं, घर का वही खाना, क्योंकि भारतीय गाइडलाइन कहती हैं कि डाइट आपके हिसाब से तय हो और घर के खाने के करीब रहे [1] [2]। आम ढांचा: आधी थाली सब्ज़ी और सलाद, चौथाई दाल, पनीर, अंडा या मछली, चौथाई रोटी या चावल, साबुत अनाज और कम चीनी के साथ [3]।

मुख्य बातें

  • थाली: आधी सब्ज़ी, चौथाई प्रोटीन, चौथाई कार्बोहाइड्रेट [3]।
  • कार्बोहाइड्रेट और फ़ाइबर: दिन की लगभग आधी से 60% एनर्जी ज़्यादातर कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट से, और रोज़ 25 से 40 ग्राम फ़ाइबर [1] [2]।
  • सब्ज़ी: रोज़ कम से कम 400 ग्राम, हर खाने में थोड़ी [4]।
  • साबुत अनाज का मतलब लो GI नहीं: एक भारतीय लैब स्टडी में रागी मुद्दे और ज्वार की रोटी का GI ऊँचा निकला [5]।
  • गुड़ और शहद भी चीनी हैं: भारतीय गाइडलाइन में शहद उन मीठी चीज़ों में है जिनसे बचना बेहतर है [1]।

डाइट बदलने से पहले अपने डॉक्टर या डाइटिशियन से बात करें, खासकर अगर आप डायबिटीज की दवा लेते हैं।

इस पेज पर
  1. डायबिटीज डाइट असल में क्या है
  2. थाली कैसे बनाएं: भारतीय डायबिटीज थाली
  3. रोटी, चावल और मिलेट्स: GI के नंबर क्या कहते हैं
  4. दाल, पनीर, अंडा, मछली और चिकन: प्रोटीन वाला हिस्सा
  5. शुगर में कौन सी सब्ज़ी खानी चाहिए, और फल कितना
  6. तेल, घी, नमक और तले हुए स्नैक्स
  7. शुगर पेशेंट डाइट चार्ट: दिन में कितनी बार और क्या खाएं
  8. चाय, मिठाई और मिठास: चीनी कहाँ फ़िट होती है
  9. The Sweet Change कहाँ फ़िट होता है
  10. शुगर में क्या नहीं खाना चाहिए, या कम खाना चाहिए
  11. कब डॉक्टर या डाइटीशियन की ज़रूरत है
  12. आपकी रसोई के लिए छोटी बात
  13. स्रोत

यह जानकारी समझने के लिए है। आपकी अपनी मात्रा आपके डॉक्टर या डाइटीशियन तय करें, ख़ासकर अगर आप डायबिटीज के लिए इंसुलिन या गोलियाँ लेते हैं।

डायबिटीज डाइट असल में क्या है

डायबिटीज डाइट मतलब रोज़ का खाना, जो इस तरह प्लान हो कि ब्लड शुगर धीरे बढ़े। साथ में वज़न और दिल की सेहत का भी ध्यान रहे। बस इतनी सी परिभाषा है, इसमें कहीं "स्पेशल मेन्यू" नहीं लिखा।

रिपोर्ट घर आती है, और रात के खाने पर पहला सवाल दवा का नहीं होता। सवाल होता है, "अब क्या खाएंगे?" घर में कोई सर्च कर चुका है, और उसे ऐसा चार्ट मिला है जिसकी एक भी चीज़ घर में कभी नहीं बनी।

तो असली सवाल यह है कि क्या अब घर में दूसरी रसोई चलानी पड़ेगी।

ज़रूरत नहीं। टाइप 2 डायबिटीज पर भारत की 2018 की गाइडलाइन ऐसी डाइट चाहती है जो आपके हिसाब से हो, लचीली हो, उसमें तरह-तरह का खाना हो, और जो घर के रोज़ के खाने के करीब हो [1]।

वह साफ़ यह भी कहती है कि कार्बोहाइड्रेट की कोई एक सही मात्रा पर सबूत पक्के नहीं हैं। इसलिए टारगेट किसी चार्ट से पढ़कर नहीं, आपके साथ बैठकर तय होते हैं [1]।

आप अकेले भी नहीं हैं। एक राष्ट्रीय सर्वे में, जिसका फ़ील्डवर्क 2008 से 2020 तक चला, भारत के लगभग हर 9 में से 1 वयस्क को डायबिटीज और लगभग हर 7 में से 1 को प्रीडायबिटीज निकली [6]।

इसलिए शुरुआत किसी और के चार्ट से नहीं, अपनी थाली से कीजिए। आगे के हिस्से आम भारतीय थाली की हर चीज़ लेते हैं: रोटी, चावल, दाल, सब्ज़ी, तेल, चाय और मिठाई। और दिखाते हैं कि जब खाने का सवाल रोज़ का सवाल बन जाए, तो हर चीज़ कहाँ फ़िट होती है।

सीधी बात: जो खाना आप जानते हैं वही रखिए; बस हिस्से, मात्रा और चीनी बदलिए।

थाली कैसे बनाएं: भारतीय डायबिटीज थाली

आधी थाली सब्ज़ी, चौथाई प्रोटीन, चौथाई कार्बोहाइड्रेट। इस पेज से एक ही बात याद रखनी हो, तो यही रखिए।

प्लेट का एक जाना-माना तरीका 9 इंच की प्लेट से शुरू होता है। आधी प्लेट में बिना स्टार्च वाली सब्ज़ियाँ, एक चौथाई में लीन प्रोटीन, और एक चौथाई में अच्छा कार्बोहाइड्रेट, जैसे साबुत अनाज, स्टार्च वाली सब्ज़ियाँ, फल या लो-फ़ैट डेयरी [3]।

अब इसे अपनी रसोई की भाषा में पढ़िए। आधी थाली में सब्ज़ी, सलाद और रायते जैसा दही।

एक चौथाई में दाल, चना, राजमा, पनीर, दही, अंडा, मछली या चिकन। और आखिरी चौथाई में रोटी या चावल।

यह ऐसी डायबिटीज डाइट है जिसे भारतीय रसोई सालों तक निभा सकती है, क्योंकि इसमें कुछ भी नया नहीं है।

सब्ज़ी वाला आधा हिस्सा ही हम में से ज़्यादातर लोग छोटा कर देते हैं। भारत की 2024 की डाइटरी गाइडलाइन रोज़ कम से कम 400 ग्राम सब्ज़ी कहती हैं, और हर खाने में ताज़ी और हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ [4]।

थाली पर इसका मतलब है दोपहर और रात, दोनों बार एक भरी कटोरी सब्ज़ी और साथ में ढेर सारा सलाद। साइड में दो चम्मच आलू नहीं।

प्रोटीन वाले हिस्से में एक पुरानी भारतीय समझ छिपी है। 2018 की गाइडलाइन लगभग 4 हिस्से अनाज और 1 हिस्सा दाल सुझाती है, जैसा इडली, डोसा, मिस्सी रोटी, खिचड़ी और ढोकला में पहले से होता है। वजह यह कि दाल खाने के प्रोटीन की क्वालिटी सुधार देती है [1]।

2024 की डाइटरी गाइडलाइन प्रोटीन की क्वालिटी के लिए अनाज और दाल का अनुपात 3 और 1 रखती हैं [4]। दो दस्तावेज़, एक ही दिशा: दाल रोटी के साथ आती है, रोटी के बाद नहीं।

सीधी बात: पहले थाली पर लकीरें खींचिए, फिर उन्हें उसी खाने से भरिए जो आप पहले से बनाते हैं।

थाली का हिस्साइसमें क्या आएकैसा दिखे (एक उदाहरण)
आधासब्ज़ी, सलाद, रायते जैसा दही, हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ1 कटोरी सब्ज़ी और ढेर सारा सलाद
एक चौथाईदाल, चना, राजमा, पनीर, दही, अंडा, मछली, चिकन1 कटोरी दाल, या मछली का एक टुकड़ा, या 2 अंडे
एक चौथाईरोटी, चावल, मिलेट्स, दूसरे साबुत अनाज2 रोटी, या लगभग एक मुट्ठी चावल

रोटी, चावल और मिलेट्स: GI के नंबर क्या कहते हैं

अनाज कौन सा है, यह उतना मायने नहीं रखता जितना लोग सोचते हैं। मात्रा और साथ में क्या खाया, यह ज़्यादा मायने रखता है। वजह नीचे है।

ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) बताता है कि कोई कार्बोहाइड्रेट वाला खाना ग्लूकोज़ के मुकाबले ब्लड शुगर को कितना बढ़ाता है। 55 या उससे कम लो माना जाता है, और 70 या उससे ज़्यादा हाई [7]।

ग्लाइसेमिक लोड इसमें मात्रा भी जोड़ता है। इसलिए एक ही आटे की 2 रोटी और 4 रोटी एक जैसा खाना नहीं हैं [7]।

भारतीय गाइडलाइन कॉम्प्लेक्स और ज़्यादा फ़ाइबर वाला कार्बोहाइड्रेट पसंद करती हैं: साबुत अनाज, बिना पॉलिश वाले अनाज, मिलेट्स, दालें, ओट्स और जौ। साथ में ऐसे खाने जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स और ग्लाइसेमिक लोड कम हो [1] [2]।

यहाँ तक बात आसान है। फिर नापे हुए नंबर आते हैं। अंतरराष्ट्रीय GI टेबल में गेहूँ की रोटी 62 पर और चपाती 52 पर नापी गई [7]।

स्वस्थ लोगों पर हुई एक भारतीय लैब स्टडी में रागी मुद्दे का GI 98, ज्वार की रोटी 84, मक्के की रोटी 75 और बाजरे की रोटी 70 निकला। सफ़ेद छोले की सुंडल सिर्फ़ 24 पर रही [5]।

उसी स्टडी के लेखकों ने लिखा कि कोई खाना सिर्फ़ साबुत अनाज से बना होने से लो GI नहीं हो जाता [5]।

यहाँ एक पेच है, उनके लिए जिन्होंने शुगर की वजह से बाजरे की रोटी शुरू कर दी। मिलेट की रोटी अपने आप गेहूँ की रोटी से हल्की नहीं होती। छोले वाला नंबर बताता है कि थाली पर दाल होने से पूरा खाना बदल जाता है।

शुगर में चावल: खाना चाहिए या नहीं

देश की आधी थाली चावल की है। सफ़ेद चावल का GI लगभग 73 और ब्राउन राइस का लगभग 68 है। इसलिए भारतीय सिफ़ारिशें कहती हैं कि चावल की मात्रा सीमित रखें, और जहाँ हो सके, सफ़ेद की जगह ब्राउन चुनें [2]।

यानी चावल बंद नहीं होता, गिना जाता है। 2 रोटी के साथ एक कटोरी दाल और एक कटोरी सब्ज़ी, या एक मुट्ठी चावल पर एक कलछी सांभर: तरीका यही है।

सीधी बात: रोटियाँ गिनिए, चावल मुट्ठी से नापिए, और अनाज कभी अकेला मत परोसिए।

आटा: कौन सा पैकेट लें

घर में हर कोई जानना चाहता है कि आटा बदलें या नहीं। छोटा जवाब: कोई एक आटा सबसे अच्छा नहीं है। चोकर समेत साबुत गेहूँ का आटा अच्छी शुरुआत है, और गूंधते समय बेसन या जौ जैसा ज़्यादा फ़ाइबर वाला आटा मिलाने से फ़ाइबर और प्रोटीन बढ़ता है।

हर आटे में 100 ग्राम पर कितना फ़ाइबर है और हर रोटी का नापा हुआ GI क्या है, यह पूरी तुलना आटे पर हमारी गाइड (अंग्रेज़ी में) में है।

दाल, पनीर, अंडा, मछली और चिकन: प्रोटीन वाला हिस्सा

दोनों खानों में एक कटोरी दाल, इस पेज का सबसे आसान सुधार है। और ज़्यादातर भारतीय घरों में इसकी रेसिपी पहले से है।

2018 की गाइडलाइन प्रोटीन को दिन की लगभग 12 से 15% एनर्जी पर रखती है: दालें, सोया, चना, मटर, लो-फ़ैट दूध और दही, मछली और लीन मीट से [1]।

2020 की सिफ़ारिशें भी लगभग 15% पर ही आती हैं। वे हफ़्ते में 100 से 200 ग्राम मछली कहती हैं, और रेड मीट से बचने को [2]।

रसोई की भाषा में थाली का यह चौथाई हिस्सा है: दाल, चना, राजमा या अंकुरित दाल; लो-फ़ैट दूध से बना दही या पनीर; और जो खाते हैं उनके लिए अंडा, मछली या चिकन। मटन कभी-कभार।

एक ईमानदार सीमा भी है: इनमें से कुछ भी इलाज नहीं है। अंडा शुगर कम नहीं करता, और पनीर किसी रोटी का असर खत्म नहीं करता। प्रोटीन को अपनी जगह इसलिए मिलती है क्योंकि वह पेट भरता है और कार्बोहाइड्रेट का हिस्सा अपनी जगह पर रखता है।

सीधी बात: दोपहर में रोटी-सब्ज़ी है तो दाल जोड़िए। रात में चावल है तो सांभर, मछली या दही जोड़िए।

शुगर में कौन सी सब्ज़ी खानी चाहिए, और फल कितना

रोज़ 400 ग्राम सब्ज़ी, जो आपने ऊपर पढ़ी, किसी भी भारतीय डायबिटीज डाइट की सबसे खाली रह जाने वाली लाइन है। और इसी में सबसे ज़्यादा जगह भी है।

सब्ज़ियाँ आसान आधा हिस्सा हैं: लौकी, भिंडी, पालक, मेथी, टिंडा, गोभी, टमाटर, खीरा और गाजर, पकी या कच्ची, हर खाने में। सब्ज़ी की कटोरी पूरी भरिए, एक प्लेट सलाद जोड़िए, और आधा हिस्सा पूरा।

फल के साथ हाथ थोड़ा हल्का रखिए। 2018 की गाइडलाइन पपीता, अमरूद, सेब, नाशपाती, संतरा और मौसंबी को सीमित मात्रा में खाने वाले फल बताती है, और कहती है कि हर तरह के फलों के जूस से बचना बेहतर है [1]।

साबुत फल, एक बार में एक, दो खानों के बीच: यही पैटर्न है। जूस का एक गिलास असल में कई फल हैं, बस चबाना हटा दिया गया है।

आम, केला, खजूर, चीकू और बाकी फलों का जवाब अलग-अलग है, और वह जवाब शायद ही कभी "कभी नहीं" होता है। जवाब होता है, "कितना, और कब।"

सीधी बात: पहले सब्ज़ी वाला आधा हिस्सा भरिए; फल साबुत खाइए, एक बार में एक, जूस नहीं।

तेल, घी, नमक और तले हुए स्नैक्स

तेल का डिब्बा और नमक की डिब्बी भी डायबिटीज डाइट का हिस्सा हैं, क्योंकि दिल की सेहत भी लक्ष्य में शामिल है। अच्छा फ़ैट चुना जाता है, उड़ेला नहीं जाता।

2018 की गाइडलाइन फ़ैट को दिन की 20 से 30% एनर्जी पर रखती है, सैचुरेटेड फ़ैट 10% या उससे कम, और ट्रांस फ़ैट 1% से कम, हो सके तो बिल्कुल नहीं। वह मोनोअनसैचुरेटेड फ़ैट वाले तेल पसंद करती है, जैसे सरसों, राइस ब्रान, मूंगफली और तिल का तेल [1]।

2020 की सिफ़ारिशें रसोई के नियम जोड़ती हैं: दो या ज़्यादा तेल बदल-बदलकर इस्तेमाल करें, वनस्पति से बचें, और तेल को दोबारा गरम करके या दोबारा तलने में इस्तेमाल न करें [2]।

नमक भी इसी हिस्से में, इसी वजह से है। दोनों भारतीय दस्तावेज़ खाने में डाला जाने वाला नमक रोज़ 5 ग्राम से कम रखते हैं [1] [2]।

रसोई में इसका मतलब है तेल डिब्बे से उड़ेलने की जगह चम्मच से नापना, और महीने भर सरसों और मूंगफली का तेल बदलते रहना। रोटी पर लगा घी भी गिनती वाला फ़ैट है।

पकौड़े, पूरी और समोसा "कभी-कभार" वाले कॉलम में चले जाते हैं। इसलिए नहीं कि वे मना हैं, बल्कि इसलिए कि दोबारा गरम किया तेल और डीप फ़्राई ऊपर की हर लाइन की गलत तरफ़ बैठते हैं।

सीधी बात: दो तेल बदल-बदलकर, उड़ेलना नहीं चम्मच से, और तले हुए स्नैक्स सिर्फ़ मौके पर।

शुगर पेशेंट डाइट चार्ट: दिन में कितनी बार और क्या खाएं

भारतीय गाइडलाइन डायबिटीज डाइट के लिए दिन भर में फैले छह छोटे खाने सुझाती है, आपकी अपनी दिनचर्या के हिसाब से [1]। छोटे और बार-बार खाने भारतीय दिन में आसानी से फ़िट होते हैं।

सुबह की चाय, नाश्ता, बीच सुबह एक फल, दोपहर का खाना, शाम 4 बजे वाली चाय के साथ कुछ, और रात का खाना: ये पहले से छह बैठकें हैं। बदलना बस यह है कि हर एक में क्या जाता है।

हमारे अपने खरीदारों के सर्वे में 31% ने कहा कि वे शाकाहारी खाना खाते हैं। इसलिए नीचे का उदाहरण पहले शाकाहारी है, और बगल में नॉन-वेज विकल्प है [8]।

यह उन्हीं खानों से बना है जिनका नाम ऊपर की भारतीय गाइडलाइन लेती हैं: अनाज और दाल वाले इडली, डोसा, खिचड़ी और ढोकला, सीमित मात्रा वाले फल, दाल, लो-फ़ैट दही, मछली और लीन मीट।

यह एक उदाहरण है, नुस्खा नहीं: आपकी मात्रा आपके डॉक्टर या डाइटीशियन तय करेंगे। कटोरी और रोटी की गिनती सिर्फ़ थाली का आकार दिखाने के लिए है, किसी की खुराक तय करने के लिए नहीं।

समयशाकाहारी डाइट चार्ट (उदाहरण)नॉन-वेज विकल्प
सुबह जल्दीदूध वाली चाय, बिना चीनी के मीठी की हुई; 5 या 6 भीगे बादामवही
नाश्ता2 इडली और एक कटोरी सांभर, या एक प्लेट ढोकला2 अंडे का ऑमलेट, एक रोटी और सलाद
बीच सुबहएक अमरूद या एक कटोरी पपीतावही
दोपहर2 रोटी, 1 कटोरी दाल, 1 कटोरी सब्ज़ी, सलाद, 1 कटोरी दही2 रोटी, 1 कटोरी चिकन करी (लीन), सब्ज़ी, सलाद
शामदूध वाली चाय, एक मुट्ठी भुने चनेवही
रात1 कटोरी मूंग दाल खिचड़ी, एक कटोरी सब्ज़ी और दहीएक मुट्ठी चावल, मछली का एक टुकड़ा, सब्ज़ी, सलाद

सीधी बात: छह बैठकें, हर एक में थाली का अपना बँटवारा, और बीच में लंबा गैप नहीं।

चाय, मिठाई और मिठास: चीनी कहाँ फ़िट होती है

डायबिटीज डाइट से चीनी गायब नहीं होती, गिनी जाती है। भारत की 2024 की डाइटरी गाइडलाइन बड़ों के लिए चीनी को दिन की एनर्जी के 5% से कम रखती हैं [4]।

इस बजट का सबसे बड़ा हिस्सा चाय का चम्मच ले जाता है। टेबल शुगर का GI 65 है, यानी मीडियम [7]। एक कप में दो चम्मच, दिन में तीन कप, और मिठाई आने से पहले ही चाय दिन की चीनी खर्च कर चुकी होती है।

बहुत से लोग चुपचाप गुड़ या शहद पर आ जाते हैं और सोचते हैं कि बात सुलझ गई। 2018 की गाइडलाइन शहद, फ़्रुक्टोज़, कॉर्न सिरप और शीरे (मोलैसिस) जैसे न्यूट्रिटिव स्वीटनर को उन चीज़ों में गिनती है जिनसे बचना बेहतर है [1]।

गन्ने के गुड़ में 100 ग्राम में लगभग 84 ग्राम शुगर होती है। यानी 4 ग्राम के एक चम्मच गुड़ में लगभग 3.4 ग्राम शुगर [9]।

हमारे अपने खरीदार भी यही पैटर्न दिखाते हैं। हमारे सर्वे में 16% खरीदारों ने कहा कि वे गुड़ या शहद छोड़कर हम पर आए, और 64% ने कहा कि वे अपना स्वीटनर चाय में इस्तेमाल करते हैं [8]।

अगर आप चम्मच के बिना चाय मीठी चाहते हैं, तो आम रास्ता स्वीटनर है। मोंक फ्रूट एक्सट्रैक्ट चीनी से 100 से 250 गुना मीठा होता है, और अमेरिका की FDA ने इसके लिए दाखिल GRAS नोटिस पर सवाल नहीं उठाए हैं [10]।

2017 के एक छोटे ट्रायल में, स्वस्थ पुरुषों में मोंक फ्रूट वाले ड्रिंक से ब्लड ग्लूकोज़ या इंसुलिन में कोई उछाल नहीं आया, जबकि चीनी वाले ड्रिंक से आया [11]।

विकल्प आपस में कैसे तुलते हैं और चाय के कप के लिए हर एक का क्या मतलब है, यह डायबिटीज के लिए स्वीटनर की तुलना (अंग्रेज़ी में) में है। मोंक फ्रूट पर रिसर्च खुद क्या कहती है, यह डायबिटीज वाले लोगों के लिए मोंक फ्रूट पर रिसर्च (अंग्रेज़ी में) में है।

सबसे काम की रसोई वाली आदत आसान है: चाय पहले बना लीजिए और मीठा कप में डालिए, पतीले में नहीं। ऐसे हर कोई अपना मीठा खुद तय करता है, और चीनी का डिब्बा चूल्हे से दूर रहता है।

The Sweet Change कहाँ फ़िट होता है

The Sweet Change में: हमारा स्वीटनर ड्रॉप्स और पाउडर में आता है, और सैशे जल्द आ रहे हैं। Monk Fruit Drops मोंक फ्रूट एक्सट्रैक्ट, पानी और विटामिन C से बने हैं; दो ड्रॉप एक चम्मच चीनी की जगह लेते हैं।

Monk Fruit Sweetener Powder मोंक फ्रूट, ग्वार फ़ाइबर और एल्यूलोज़ (30% / 35% / 35%) से बना है, बिना एरिथ्रिटॉल के। दोनों में न एरिथ्रिटॉल है, न कोई और शुगर अल्कोहल।

शुगर में क्या नहीं खाना चाहिए, या कम खाना चाहिए

डायबिटीज में क्या खाएं और किससे बचें, यह ज़्यादातर इस बात का सवाल है कि पैकेट या बोतल में क्या आता है। घर की बनी थाली शायद ही कभी असली दिक्कत होती है।

  • मीठे ड्रिंक्स: भारतीय सिफ़ारिशें कहती हैं कि चीनी वाले ड्रिंक्स से बचना बेहतर है, इसलिए कोल्ड ड्रिंक, पैकेट वाले जूस और मीठी लस्सी रोज़ की लिस्ट से बाहर [2]।
  • फलों का जूस: ताज़ा हो तब भी उससे बचना बेहतर है, जैसा ऊपर बताया; जूस की जगह फल खाइए।
  • रिफ़ाइंड अनाज और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाना: भारत की डाइटरी गाइडलाइन इनकी जगह साबुत अनाज और मिलेट्स चुनने को कहती हैं, और ज़्यादा फ़ैट, चीनी और नमक वाले खाने से बचने को [4]। मैदा, व्हाइट ब्रेड, बिस्किट और ज़्यादातर पैकेट वाले स्नैक्स यहीं आते हैं।
  • अचार, चटनी और पैकेट वाली नमकीन: 2018 की गाइडलाइन इन्हें नमक की वजह से सीमित करती है, ऊपर बताई रोज़ 5 ग्राम की सीमा के साथ [1]।

सीधी बात: चूल्हे से खाइए, पैकेट वाला कम कीजिए, और मिठास कप में रखिए, बोतल में नहीं।

कब डॉक्टर या डाइटीशियन की ज़रूरत है

ऊपर जो कुछ है, वह डायबिटीज डाइट का आम ढांचा है। कुछ हालात में नंबर बदल जाते हैं, और उन्हें आपके लिए सिर्फ़ आपका डॉक्टर या डाइटीशियन बदल सकता है।

  • इंसुलिन या शुगर कम कर सकने वाली गोलियाँ: खाने का समय और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा दवा के हिसाब से तय होती है, इसलिए इनमें से कुछ भी खुद से न बदलें।
  • टाइप 1 डायबिटीज: कार्बोहाइड्रेट गिनना और इंसुलिन साथ चलते हैं; यह पेज टाइप 2 के लिए लिखा गया है।
  • प्रेगनेंसी: जेस्टेशनल डायबिटीज के अपने टारगेट और अपना डाइटीशियन प्लान होता है।
  • किडनी की बीमारी: नेफ़्रोपैथी होने पर 2018 की गाइडलाइन प्रोटीन और सोडियम के अलग टारगेट रखती है, और प्रोटीन घटाने की सलाह नेफ़्रोलॉजिस्ट से बात करके देती है [1]।
  • बहुत सख्त डाइट: 2020 की सिफ़ारिशें कीटो और दूसरी बहुत सख्त डाइट सिर्फ़ थोड़े समय के लिए, डॉक्टर और न्यूट्रिशनिस्ट की निगरानी में ही मानती हैं [2]।

अगर रिपोर्ट में डायबिटीज नहीं, प्रीडायबिटीज लिखा है, तो भी ऊपर वाली थाली लागू होती है; बस डॉक्टर के तय किए टारगेट अलग होंगे।

आपकी रसोई के लिए छोटी बात

चीट शीट

  • थाली बनाइए: आधी सब्ज़ी और सलाद, चौथाई दाल या दूसरा प्रोटीन, चौथाई रोटी या चावल।
  • अनाज गिनिए: 2 रोटी या एक मुट्ठी चावल, कभी अकेले नहीं; मिलेट की रोटी अपने आप लो GI नहीं होती।
  • सब्ज़ी वाला आधा भरिए: रोज़ 400 ग्राम, यानी दोनों बड़े खानों में एक भरी कटोरी सब्ज़ी और सलाद।
  • छह बैठकें, लंबा गैप नहीं: फल साबुत और खानों के बीच, जूस नहीं।
  • मिठास कप में: गुड़ और शहद भी चीनी हैं; चीनी दिन की एनर्जी के 5% से कम रहे, और स्वीटनर चम्मच के बिना चाय मीठी रखता है।

शुगर में क्या खाना चाहिए, इसका जवाब आपकी अपनी थाली है, बस नए बँटवारे के साथ: ज़्यादा सब्ज़ी और दाल, गिना हुआ अनाज, चम्मच से तेल, और ऐसी मिठास जो चीनी के डिब्बे से न आए। आटे से लेकर फल और स्वीटनर तक, बाकी बातों के लिए हमारी डायबिटीज गाइड से शुरू कीजिए।

मोंक फ्रूट ड्रॉप्स और पाउडर, सैशे जल्द आ रहे हैं। Monk Fruit Drops: दो ड्रॉप एक चम्मच चीनी की जगह लेते हैं। Monk Fruit Sweetener Powder: मोंक फ्रूट, ग्वार फ़ाइबर और एल्यूलोज़ (30% / 35% / 35%) से बना, बिना एरिथ्रिटॉल के। दोनों में न एरिथ्रिटॉल है, न कोई और शुगर अल्कोहल। हमारे स्वीटनर देखिए

लोग अक्सर पूछते हैं

डायबिटीज में क्या खाना चाहिए?

वही जो घर में बनता है, बस थाली अलग ढंग से: आधी सब्ज़ी और सलाद, चौथाई दाल, पनीर, दही, अंडा, मछली या चिकन, और चौथाई रोटी या चावल, जहाँ हो सके साबुत अनाज। टाइप 2 डायबिटीज पर ICMR की गाइडलाइन ऐसा प्लान चाहती है जो आपके हिसाब से हो और घर के खाने के करीब हो।

शुगर में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, इसकी लिस्ट क्या है?

खाइए: सब्ज़ी, सलाद, दाल, चना, दही, पनीर, मछली, साबुत अनाज, और थोड़ी मात्रा में अमरूद, पपीता, सेब जैसे साबुत फल। कम कीजिए: मीठे ड्रिंक्स, फलों का जूस, रिफ़ाइंड अनाज, पैकेट वाले स्नैक्स, अचार और नमकीन। ये लिस्ट ICMR 2018, RSSDI-ESI 2020 और ICMR-NIN 2024 की गाइडलाइन से हैं।

डायबिटीज के लिए सबसे अच्छी डाइट कौन सी है?

कोई एक सबसे अच्छी डाइट नहीं है। सबसे अच्छी वह है जो आपके लिए तय हो और घर के खाने के करीब हो, जैसा ICMR की 2018 गाइडलाइन कहती है। वह यह भी मानती है कि कार्बोहाइड्रेट की एक सही मात्रा पर सबूत पक्के नहीं हैं, इसलिए आपका डाइटीशियन आपका हिस्सा तय करता है।

शुगर पेशेंट का एक दिन का खाना कैसा हो सकता है?

ICMR की 2018 गाइडलाइन के हिसाब से छह छोटे खाने: सुबह कुछ हल्का, नाश्ते में इडली-सांभर या डोसा, बीच सुबह एक फल, दोपहर में रोटी, दाल, सब्ज़ी और दही, शाम को चाय के साथ भुने चने, और रात को खिचड़ी जैसा हल्का खाना। मात्रा आपका डाइटीशियन तय करेगा।

शुगर में दिन में कितनी बार खाना चाहिए?

ICMR की 2018 गाइडलाइन दो-तीन बड़े खानों की जगह दिन में छह छोटे खाने सुझाती है, जिनका समय आपकी दिनचर्या और दवाओं से तय हो। मकसद है हर बार कम मात्रा और बीच में लंबा गैप नहीं। इंसुलिन या शुगर कम करने वाली गोली लेते हैं, तो गैप डॉक्टर तय करेंगे।

क्या डायबिटीज डाइट में मात्रा पर ध्यान देना ज़रूरी है?

हाँ, गेहूँ की वही रोटी दो की जगह चार खाने पर दोगुना कार्बोहाइड्रेट देती है। इसीलिए RSSDI-ESI की 2020 सिफ़ारिशें चावल की मात्रा सीमित करने और कम ग्लाइसेमिक लोड वाले खाने की बात करती हैं। कटोरी, मुट्ठी भर चावल और रोटी की गिनती, यही मात्रा नापने के औज़ार हैं।

जो खाते हैं, उसका ब्लड शुगर पर क्या असर पड़ता है?

कार्बोहाइड्रेट वाले खाने ब्लड शुगर सबसे ज़्यादा बढ़ाते हैं। कितनी तेज़ी से, यह खाने के GI और मात्रा पर निर्भर है, जिसे ग्लाइसेमिक लोड नापता है। 2022 की एक भारतीय लैब स्टडी में रागी मुद्दे और ज्वार की रोटी ऊँचे और छोले की सुंडल नीचे निकली, यानी थाली की दाल पूरा खाना बदल देती है।

Monk Fruit Drops (100 सर्विंग)Monk Fruit Drops (100 सर्विंग) Rs. 497.00 Monk Fruit Drops (300 सर्विंग)Monk Fruit Drops (300 सर्विंग) Rs. 1,197.00 Monk Fruit Powder No Erythritol (100 सर्विंग)Monk Fruit Powder No Erythritol (100 सर्विंग) Rs. 675.00 Monk Fruit Powder No Erythritol (300 सर्विंग)Monk Fruit Powder No Erythritol (300 सर्विंग) Rs. 1,493.00
Jatin Agnihotri

लेखक
Jatin Agnihotri · COO और को-फ़ाउंडर

MBA, Indian School of Business · टेक्नोलॉजी और सिक्योरिटी में 12 साल

Jatin Agnihotri The Sweet Change के COO और को-फ़ाउंडर हैं। वे ऑपरेशंस संभालते हैं, मैन्युफ़ैक्चरर और वेंडर से लेकर शिपिंग और लॉजिस्टिक्स तक, और हमारे Instagram के लिए कंटेंट बनाते हैं। उन्होंने 12 साल टेक्नोलॉजी में काम किया है: Honda Cars India, Extramarks Education (जहाँ वे Vice President IT थे) और Jio Platforms में। उनके पास ISB से MBA है।

Disclosure: The Sweet Change के को-फ़ाउंडर

Kapil Groverr

रिव्यूअर
Kapil Groverr · चीफ़ बिज़नेस ऑफ़िसर और को-फ़ाउंडर

IIM लखनऊ के पूर्व छात्र · मार्केटिंग में 18 साल

Kapil Groverr, The Sweet Change के को-फ़ाउंडर और चीफ़ बिज़नेस ऑफ़िसर हैं, जहाँ वे ग्रोथ और मार्केटिंग देखते हैं। उन्हें मार्केटिंग में 18 साल का अनुभव है। हाल में वे Breathe Well-being में वाइस प्रेसिडेंट मार्केटिंग थे, और उससे पहले King Koil में हेड ऑफ़ डिजिटल मार्केटिंग। IIM लखनऊ के पूर्व छात्र, वे हमारी स्वीटनर गाइड और तुलनाएँ लिखते हैं।

Writes about: स्वीटनर गाइड और तुलनाएँ

Disclosure: The Sweet Change के को-फ़ाउंडर

Manvi Agnihotri

मेडिकल रिव्यू
Manvi Agnihotri · CEO और को-फ़ाउंडर

क्लिनिकल न्यूट्रिशन में 12 साल, 11,000 से ज़्यादा मरीज़ · फ़ूड एंड न्यूट्रिशन में M.Sc, सिल्वर मेडलिस्ट

Manvi Agnihotri, The Sweet Change की CEO और को-फ़ाउंडर हैं। उन्होंने फ़ूड एंड न्यूट्रिशन में M.Sc किया है, जिसमें वे सिल्वर मेडलिस्ट रहीं। डायबिटीज केयर प्रोग्राम Breathe Well-being में उन्होंने ब्रांड स्ट्रैटेजी और मरीज़ों व डॉक्टरों को जानकारी देने का काम संभाला। वे हमारे हेल्थ और न्यूट्रिशन पेज लाइव होने से पहले रिव्यू करती हैं।

Writes about: न्यूट्रिशन और फ़ूड साइंस, ब्लड शुगर और डायबिटीज डाइट

Disclosure: The Sweet Change की को-फ़ाउंडर

स्रोत

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  8. The Sweet Change (2026). Post-purchase survey of our own buyers. Internal data; percentages are whole-number shares of the buyers who answered each question. https://www.thesweetchange.com/
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