शाम के 4 बजे हैं। डेडलाइन पहले खिसक आई। आपका हाथ बिस्किट के पैकेट में है।

स्ट्रेस ईटिंग: क्या आपको सच में भूख लगी है?

गाइड पढ़िए

स्ट्रेस ईटिंग का मतलब

भूख मिटाने के लिए नहीं, किसी भावना से निपटने के लिए खाना।

यह आम है। यह कोई चरित्र की कमज़ोरी नहीं है।

आसान शब्दों में

कई लोग कहते हैं: "स्ट्रेस में हर कोई ज़्यादा खाता है।"

स्टूडेंट्स के एक सर्वे में, 38% ने कहा कि वे स्ट्रेस में ज़्यादा खाते हैं और 42% ने कहा कि कम।

हर किसी में अलग

30 सेकंड की जांच

क्या कोई भी खाना चलेगा?

असली भूख लगभग किसी भी खाने से शांत हो सकती है। स्ट्रेस वाली तलब में आम तौर पर लगता है कि सिर्फ़ एक खास चीज़ ही चलेगी।

भूख या स्ट्रेस

पैकेट खोलने से पहले

कहिए "यह स्ट्रेस है, भूख नहीं।" तलब को 1 से 10 के बीच नंबर दीजिए।

फिर 10 मिनट रुकिए और दोबारा नंबर दीजिए।

10 मिनट का प्लान

जवाब

जिस तलब पर आप अमल नहीं करते, वह आम तौर पर कुछ देर बढ़ती है, फिर हल्की पड़ जाती है।

भूख खाने से शांत होती है।

जवाब

और रात 11 बजे का स्नैक?

लेख में कम नींद और देर रात की तलब की बात है, और भारतीय किचन वाले रूप की भी: चाय, मिठाई और शाम 4 बजे की सुस्ती।

पूरा लेख पढ़िए

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